
स्वर्गीय पी. सी. गोयल
भारत में मूल्यांकन के जनक
स्वर्गीय पी. सी. गोयल, जिन्हें भारत में "मूल्यांकन के जनक" के रूप में जाना जाता है, एक दूरदर्शी व्यक्तित्व थे जिनके समर्पण और दूरदृष्टि ने मूल्यांकन व्यवसाय को आज के स्वरूप में ढाला। उनकी कहानी जुनून, प्रतिबद्धता और व्यावसायिक उत्कृष्टता की दिशा में अथक प्रयासों की कहानी है।
प्रारंभिक जीवन एवं प्रेरणा
1926 में जम्मू के एक साधारण परिवार में जन्मे पी. सी. गोयल का सिविल इंजीनियरिंग से परिचय बहुत पहले हो गया था, क्योंकि उनके पिता प्रमुख राजमार्ग परियोजनाओं में शामिल थे। बचपन की जिज्ञासा ने उन्हें अपने पिता के साथ निर्माण स्थलों पर जाने को प्रेरित किया, जिससे उन्होंने वास्तुकला और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा पाई।
उन्होंने 1950 के दशक में इंग्लैंड में अपनी शिक्षा पूरी की और भारत लौटकर अपने घर के एक छोटे कार्यालय से अपनी व्यावसायिक यात्रा शुरू की। उनके दृढ़ संकल्प ने उन्हें पेशेवरों का एक विशिष्ट समूह बनाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को संस्था का संरक्षक बनने का आमंत्रण देना भी शामिल था — एक ऐसा प्रस्ताव जिसे नेहरू जी ने विनम्रतापूर्वक स्वीकार किया।
आई ओ वी की स्थापना
पी. सी. गोयल के पास मूल्यांकन व्यवसाय के लिए एक साहसिक दृष्टि थी — एक ऐसा क्षेत्र जो उस समय भारत में अपेक्षाकृत अज्ञात था। 2 अक्टूबर 1968 को, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर, पी. सी. गोयल ने इंस्टीट्यूशन ऑफ वैल्यूअर्स (आई ओ वी) की स्थापना की। उनके नेतृत्व ने मूल्यांकनकर्ताओं के एक बिखरे हुए समूह को एक राष्ट्रीय व्यावसायिक संस्था में रूपांतरित कर दिया।
अग्रणी पहल
पी. सी. गोयल ने कई ऐसे प्रयास किए जिन्होंने इस व्यवसाय में योगदान दिया:
- इंडियन वैल्यूअर पत्रिका: उनके नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पत्रिका मूल्यांकन ज्ञान के लिए एक प्रतिष्ठित मंच बनी हुई है। श्री गोयल ने संपादक के रूप में बड़ी सावधानी से लेखों का चयन किया और देश के सर्वश्रेष्ठ मूल्यांकनकर्ताओं को योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया।
- इंडियन वैल्यूअर्स कांग्रेस (आई वी सी): उनकी दूरदृष्टि के तहत यह वार्षिक कार्यक्रम एक मानक-निर्धारण मंच बन गया जहाँ प्रतिष्ठित वक्ताओं ने ज्ञान साझा किया और पूरे भारत में मूल्यांकनकर्ताओं के करियर को समृद्ध किया।
आई ओ वी का विकास
उनके कुशल नेतृत्व में आई ओ वी 52 शाखाओं और 30,000 से अधिक सदस्यों वाली एक राष्ट्रव्यापी संस्था में विकसित हुई। उनके अथक परिश्रम ने आई ओ वी को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी मूल्यांकन संस्था बना दिया। आज आई ओ वी को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है और सरकारें तथा व्यावसायिक संस्थाएँ इस संस्था के साथ सहयोग की इच्छुक हैं।
विरासत
स्वर्गीय पी. सी. गोयल के समर्पण की परिणति 2018 में आई ओ वी रजिस्टर्ड वैल्यूअर्स फाउंडेशन (आई ओ वी आर वी एफ़) की स्थापना में हुई, जो भारत की सबसे बड़ी पंजीकृत मूल्यांकनकर्ता संस्थाओं में से एक है। उनका जीवन दृढ़ संकल्प और सत्यनिष्ठा की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने एक स्थायी विरासत छोड़ी है जो मूल्यांकनकर्ताओं की आने वाली पीढ़ियों को इस गतिशील क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
"स्वर्गीय पी. सी. गोयल"
भारत में मूल्यांकन के जनक — 1926 — सदैव स्मृति में
